संतोषी माता व्रत कथा
संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को किया जाता है और इसे संतोष, सुख एवं मनोकामना पूर्ति का व्रत माना जाता है। नीचे संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि और नियम दिए गए हैं।
बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक बुढ़िया अपने सात बेटों के साथ रहती थी। छह बेटे कमाते थे और सातवाँ कुछ नहीं करता था। बुढ़िया छह बेटों को भरपेट भोजन कराती और बचा-खुचा सातवें को दे देती। सातवें की पत्नी यह सब चुपचाप सहती रहती।
एक दिन जब सातवें बेटे को यह बात पता चली तो वह दुखी होकर परदेस कमाने चला गया। जाते समय पत्नी ने कोई निशानी माँगी, परंतु उसके पास देने को कुछ न था — उसने आँगन में पड़े गोबर से उसके हाथ पर छाप लगा दी।
पति के जाने के बाद बहू पर घर में और अधिक अत्याचार होने लगा। एक दिन वह मंदिर गई, जहाँ स्त्रियाँ संतोषी माता का व्रत कर रही थीं। उसने व्रत की विधि पूछी और स्वयं भी हर शुक्रवार संतोषी माता का व्रत करने का संकल्प लिया। वह गुड़ और भुने चने का प्रसाद चढ़ाती और व्रत के दिन खटाई (खट्टी वस्तु) ग्रहण नहीं करती।
माता की कृपा से उसका पति परदेस में सुखी एवं धनवान हो गया और शीघ्र ही घर लौट आया। परिवार में सुख-समृद्धि का वास हुआ। कुछ समय बाद, जब बहू ने व्रत का उद्यापन किया, तो कुछ ईर्ष्यालु लोगों ने बच्चों को खटाई खिला दी, जिससे व्रत में बाधा-सी आ गई और थोड़ी विपत्ति आई। परंतु बहू ने पुनः पूर्ण श्रद्धा से व्रत का उद्यापन किया और संतोषी माता प्रसन्न हो गईं। तभी से संतोषी माता का शुक्रवार व्रत सुख, संतोष और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
🪔 व्रत एवं पूजा विधि
- शुक्रवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख जल का कलश रखें।
- गुड़ और भुने चने का प्रसाद अर्पित करें।
- श्रद्धापूर्वक संतोषी माता व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- अंत में माता की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें व बाँटें।
व्रत के नियम
- व्रत के दिन खटाई (खट्टी वस्तु) न स्वयं खाएँ, न किसी को खिलाएँ।
- व्रत लगातार सोलह शुक्रवार या मनोकामना पूर्ण होने तक किया जाता है।
- मनोकामना पूर्ण होने पर विधिपूर्वक व्रत का उद्यापन करें।
- व्रत श्रद्धा और संतोष के भाव से करें — यही इस व्रत का मूल है।
प्रश्न-उत्तर
संतोषी माता का व्रत किस दिन किया जाता है?
संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को किया जाता है।
व्रत में खटाई क्यों नहीं खाई जाती?
मान्यता है कि खटाई से व्रत खंडित होता है, इसलिए व्रत के दिन खट्टी वस्तु न खाने का नियम है।
व्रत कितने शुक्रवार करना चाहिए?
सामान्यतः सोलह शुक्रवार या मनोकामना पूर्ण होने तक व्रत किया जाता है, फिर उद्यापन करते हैं।