श्री गणेश चालीसा — अर्थ सहित सम्पूर्ण पाठ

श्री गणेश चालीसा के बारे में

श्री गणेश चालीसा भगवान श्री गणेश की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत लोकप्रिय स्तोत्र है। इसमें भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप, बुद्धि, सिद्धि, विघ्नों के नाश और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

मान्यता है कि श्रद्धा एवं विश्वास के साथ गणेश चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी कार्यों में सफलता, बुद्धि, समृद्धि तथा शुभ फल प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से बुधवार, गणेश चतुर्थी तथा संकष्टी चतुर्थी के दिन इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।

🌺 पाठ से पहले बोलें

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

श्री गणेश चालीसा — सम्पूर्ण पाठ

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥


॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू।

मंगल भरण करण शुभः काजू॥

जै गजबदन सदन सुखदाता।

विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।

तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला।

स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।

मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।

चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।

गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।

मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।

अति शुची पावन मंगलकारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी।

पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।

तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी।

बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।

मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।

बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।

पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै।

पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।

लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।

नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।

सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा।

देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।

बालक, देखन चाहत नाहीं॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो।

उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई।

का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।

शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।

बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।

सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा।

शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।

काटी चक्र सो गज सिर लाये॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।

प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।

पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन, भरमि भुलाई।

रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।

तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।

नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।

शेष सहसमुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी।

करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।

जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै।

अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥


॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

गणेश चालीसा का अर्थ

श्री गणेश चालीसा में भगवान गणपति के स्वरूप, उनके गुण, ज्ञान, करुणा तथा विघ्नहर्ता स्वरूप का वर्णन किया गया है।

इस चालीसा में बताया गया है कि—

  • भगवान गणेश सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं।
  • वे बुद्धि, विवेक और ज्ञान के दाता हैं।
  • वे भक्तों के जीवन से विघ्न और संकट दूर करते हैं।
  • वे सफलता, सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं।
  • सच्चे मन से की गई प्रार्थना को अवश्य स्वीकार करते हैं।

यह चालीसा भक्त को भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, समर्पण और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देती है।

✨ पाठ के लाभ

नियमित रूप से श्री गणेश चालीसा का पाठ करने से —

  • जीवन के विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं।
  • बुद्धि एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
  • विद्यार्थियों को पढ़ाई एवं परीक्षा में सफलता मिलती है।
  • नए कार्यों में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • व्यापार एवं नौकरी में उन्नति होती है।
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • मन को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास मिलता है।

🪔 पाठ की विधि

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक एवं धूप जलाएँ।
  3. दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर एवं मोदक अर्पित करें।
  4. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 11 या 21 बार जप करें।
  5. श्रद्धापूर्वक श्री गणेश चालीसा का पाठ करें।
  6. अंत में गणेश जी की आरती करें।
  7. प्रसाद सभी में वितरित करें।

यह भी पढ़ें: गणेश जी की आरती

प्रश्न-उत्तर

गणेश चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

प्रतिदिन पढ़ सकते हैं, लेकिन बुधवार, गणेश चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी को इसका विशेष महत्व है।

गणेश चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह ब्रह्ममुहूर्त या पूजा के समय।

गणेश चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?

विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि बढ़ती है, कार्यों में सफलता मिलती है तथा घर में सुख-समृद्धि आती है।

क्या विद्यार्थी गणेश चालीसा पढ़ सकते हैं?

हाँ। भगवान गणेश बुद्धि और विद्या के देवता हैं। विद्यार्थी नियमित पाठ करें तो एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति में लाभ मिलता है।

गणेश चालीसा के बाद क्या पढ़ना चाहिए?

गणेश जी की आरती, गणपति अथर्वशीर्ष, ॐ गं गणपतये नमः मंत्र, और संकटनाशन गणेश स्तोत्र

🔔 यूट्यूब पर Man Mandir Mantra — कथा व आरती वीडियो के लिए सब्सक्राइब करें