अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती – बोल, अर्थ व महत्व

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती के बारे में

“अम्बे तू है जगदम्बे काली” माँ दुर्गा (जगदम्बा) को समर्पित सबसे लोकप्रिय आरती है, जो नवरात्रि, दुर्गा पूजा एवं देवी पूजन के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है। इसमें माँ भगवती के शक्ति स्वरूप और भक्तों की रक्षा करने वाले रूप की महिमा है। नीचे आरती के पूर्ण बोल, महत्व और विधि दी गई है।

अम्बे तू है जगदम्बे काली — पूर्ण आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,

तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।


।।अम्बे तू है जगदम्बे काली।।


तेरे भक्त जनो पर, माता भीड़ पड़ी है भारी।

दानव दल पर टूट पडो माँ करके सिंह सवारी॥

सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,

दुष्टों को तू ही ललकारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


॥अम्बे तू है जगदम्बे काली॥


माँ-बेटे का है इस जग मे, बडा ही निर्मल नाता।

पूत-कपूत सुने है, पर ना माता सुनी कुमाता॥

सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,

दुखियों के दुखडे निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


॥अम्बे तू है जगदम्बे काली॥


नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।

हम तो मांगें, माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना॥

सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,

सतियों के सत को सवांरती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


॥अम्बे तू है जगदम्बे काली॥


चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।

वरद हस्त सर पर रख दो, माँ संकट हरने वाली॥

माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,

भक्तों के कारज तू ही सारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


॥अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

महत्व एवं लाभ

मान्यता है कि सच्चे मन से माँ जगदम्बा की आरती करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा माँ की कृपा से घर में सुख, शक्ति और समृद्धि आती है। यह आरती विशेषकर नवरात्रि, दुर्गा पूजा और किसी भी देवी पूजन के अंत में गाई जाती है।

🪔 आरती की विधि

  1. स्वच्छ मन एवं वस्त्रों के साथ माँ दुर्गा के सम्मुख बैठें।
  2. घी का दीपक जलाएँ, लाल पुष्प, सिंदूर और लाल चुनरी अर्पित करें।
  3. दीपक हाथ में लेकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ।
  4. आरती के अंत में सभी को ज्योति दें और प्रसाद बाँटें।

प्रश्न-उत्तर

अम्बे तू है जगदम्बे आरती कब गाई जाती है?

यह आरती नवरात्रि, दुर्गा पूजा तथा किसी भी देवी पूजन के अंत में गाई जाती है।

यह आरती किस देवी की है?

यह आरती माँ दुर्गा (जगदम्बा) को समर्पित है।

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