श्री शिव चालीसा के बारे में
श्री शिव चालीसा भगवान भोलेनाथ की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय स्तोत्र है। इसमें भगवान शिव के दयालु, करुणामय, संहारक और कल्याणकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव चालीसा का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन के कष्ट, भय और बाधाएँ दूर होती हैं।
शिव चालीसा का पाठ विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण (सावन) मास, प्रदोष व्रत तथा अन्य शिव पूजा के अवसरों पर किया जाता है। नीचे आप श्री शिव चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, उसका सरल अर्थ, महत्व, लाभ और विधि पढ़ सकते हैं।
🌺 पाठ से पहले बोलें
॥ ॐ नमः शिवाय ॥
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्॥
या
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
श्री शिव चालीसा — सम्पूर्ण पाठ
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
शिव चालीसा का अर्थ
शिव चालीसा में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनके गुणों, करुणा, वैराग्य और भक्तवत्सल स्वभाव का वर्णन किया गया है।
इसमें भगवान शिव को—
- त्रिलोकी के स्वामी
- नीलकंठ
- भोलेनाथ
- महाकाल
- पशुपतिनाथ
- कैलाशपति
- त्रिपुरारी
- भक्तों के संकट हरने वाले देव
के रूप में स्मरण किया गया है।
यह चालीसा हमें सिखाती है कि भगवान शिव अत्यंत सरल, दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना को वे अवश्य स्वीकार करते हैं और अपने भक्तों को भय, रोग, शोक एवं संकटों से रक्षा प्रदान करते हैं।।
✨ पाठ के लाभ
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक शिव चालीसा का पाठ करने से—
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- मानसिक शांति और आत्मिक बल मिलता है।
- भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- परिवार में सुख-समृद्धि एवं सौहार्द बढ़ता है।
- कठिन कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
- ग्रह दोष एवं जीवन की अनेक बाधाएँ कम होती हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति और भगवान शिव के प्रति भक्ति बढ़ती है।
विशेष रूप से सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि तथा प्रदोष व्रत के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
🪔 पाठ की विधि
- प्रातःकाल या संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शिव के शिवलिंग या चित्र के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
- बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, गंगाजल और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
- श्रद्धापूर्वक श्री शिव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में शिव जी की आरती करें।
- प्रसाद वितरित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें।
यह भी पढ़ें: गणेश जी की आरती
प्रश्न-उत्तर
शिव चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
प्रतिदिन पढ़ी जा सकती है, लेकिन सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन के महीने और प्रदोष व्रत के दिन इसका विशेष महत्व है।
शिव चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या संध्या समय शिव पूजा के बाद।
क्या सावन में प्रतिदिन शिव चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ। सावन में प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?
शिव चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति, भय से मुक्ति, जीवन की बाधाओं के निवारण, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
शिव चालीसा के बाद क्या पढ़ना चाहिए?
शिव चालीसा के बाद निम्नलिखित का पाठ किया जा सकता है—
- शिव जी की आरती
- महामृत्युंजय मंत्र
- शिव पंचाक्षर स्तोत्र
- रुद्राष्टकम्
- शिव तांडव स्तोत्र
क्या महिलाएँ शिव चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ। सावन में प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।